संत काव्य परंपरा और स्त्री लेखन
Author(s): ललिता गुप्ता
Authors Affiliations:
शोधार्थी, हिंदी विभाग, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय,अलमोड़ा
DOIs:10.2018/SS/202606017     |     Paper ID: SS202606017सारांश : हिंदी की संत-काव्य परंपरा को प्रायः कबीर से आरंभ मानकर दादू, रैदास, नानक, धर्मदास आदि पुरुष संतों तक सीमित कर दिया जाता है। इस विवेचन में एक महत्वपूर्ण पक्ष सदैव उपेक्षित रह जाता है महिला संत कवयित्रियों का योगदान। प्रस्तुत शोध-पत्र इसी उपेक्षित पक्ष को केंद्र में रखकर बावरी साहिबा, सहजो बाई और दया बाई जैसी संत कवयित्रियों की काव्य-साधना का अध्ययन प्रस्तुत करता है, और यह दर्शाता है कि गुरु-महिमा, निर्गुण-सगुण समन्वय, वैराग्य, सत्संग और सामाजिक रूढ़ि-खंडन जैसे समस्त संत-मूल्यों का निर्वाह इन कवयित्रियों ने पुरुष संतों के समकक्ष ही किया। यह पत्र इस प्रश्न को भी उठाता है कि साहित्य-इतिहास में इन्हें वह स्थान क्यों नहीं मिला जो अन्य संतों को मिला।
ललिता गुप्ता (2026); संत काव्य परंपरा और स्त्री लेखन, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 9, Issue – 6, Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
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