आधुनिक कृषि तकनीक तथा कृषि उत्पादकता प्रभावित करने वाले कारको का अध्ययन (जौनपुर जनपद के सन्दर्भ में)
Author(s): 1. संदीप कुमार यादव, 2. डॉ. शिप्रा राय
Authors Affiliations:
- शोध छात्र -अर्थशास्त्र, डॉ. राम मनोहर लोहिया राजकीय पी.जी. महाविद्यालय, मुफ़्तीगंज, जौनपुर, उ. प्र. ,भारत
2. असिस्टेंट प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग, संत कवि बाबा बैजनाथ राजकीय पी.जी. महाविद्यालय, हरख, बाराबंकी, उ. प्र. ,भारत
DOIs:10.2018/SS/202606016     |     Paper ID: SS202606016परंपरागत कृषि में किसान घर के पुराने बीजों का उपयोग करते थे। खाद के रूप में केवल गोबर की खाद (FYM) का प्रयोग होता था। सिंचाई पूरी तरह मानसून या कच्ची नहरों पर निर्भर थी। लागत कम थी, लेकिन जोखिम (कीट, सूखा) अधिक था और उत्पादन केवल परिवार की जरूरतों तक सीमित रहता था। परंपरागत में किसान बैलों से जुताई, हाथ से बुवाई और हंसिये से कटाई करते थे । इसमें समय और शारीरिक श्रम बहुत अधिक लगता था जबकि आधुनिक 'प्रमाणित बीज' (Certified Seeds) और हाइब्रिड बीजों का चलन है। यूरिया/DAP के साथ अब नैनो यूरिया और सूक्ष्म पोषक तत्वों (Zinc, Boron) का प्रयोग बढ़ा है। ट्रैक्टर, रोटावेटर और कंबाइन हार्वेस्टर ने जौनपुर में श्रम की कमी को दूर किया है। जिस काम में पहले 10 दिन लगते थे, वह अब कुछ घंटों में हो जाता है। तकनीकी यंत्रों और महंगे बीजों के कारण खेती की लागत (Input Cost) बढ़ी है, लेकिन उत्पादन कई गुना बढ़ने से शुद्ध लाभ (Net Profit) में वृद्धि हुई है। जनपद जौनपुर में धान का क्षेत्रफल लगभग 2.5–3 लाख हेक्टेयर तथा उत्पादकता: 2001 में ~2.2 टन/हेक्टेयर → 2024 में ~3.5 टन/हेक्टेयर, गेहूँ का क्षेत्रफल: ~2 लाख हेक्टेयर तथा उत्पादकता 2001 में ~2.5 टन/हेक्टेयर → 2024 में ~3.8 टन/हेक्टेयर, गन्ना का क्षेत्रफल ~60–70 हजार हेक्टेयर और उत्पादकता 2001 में ~55 टन/हेक्टेयर → 2024 में ~80–85 टन/हेक्टेयर, दलहन (Pulses – अरहर, मसूर, उरद) का जौनपुर जनपद में क्षेत्रफल ~40–50 हजार हेक्टेयर और उत्पादकता स्थिर नहीं, 2001–2024 में ~0.8–1.2 टन/हेक्टेयर है।
संदीप कुमार यादव, डॉ. शिप्रा राय (2026); आधुनिक कृषि तकनीक तथा कृषि उत्पादकता प्रभावित करने वाले कारको का अध्ययन (जौनपुर जनपद के सन्दर्भ में), Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 9, Issue – 6, Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
- कृष्णस्वामी, के. एस. (1994):”नई आर्थिक व्यवस्था के अंतर्गत कृषि विकास”, आर्थिक और राजनीतिक साप्ताहिक, खंड XXIX, संख्या 26, 25 जून, पृष्ठ-A65-A71
- अनीता शाह, ए. (1997): “खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंचः हाल के रुझानों की समीक्षा”, आर्थिक और राजनीतिक साप्ताहिक, खंड XXXII, संख्या 26, 28 जून, पृष्ठ-A46-A54
- देसाई, एम. भूपति (2002): “कृषि विकास को पुनर्दिशित करने हेतु नीतिगत ढांचा”, भारतीय कृषि अर्थशास्त्र पत्रिका इंडियन, खंड 57, संख्या 1, जनवरी-मार्च, पृष्ठ-1-21
- महेंद्र, देव एस. (2002): “कृषि और ग्रामीण रोज़गार पर साहसिक पहल की आवश्कता”, आर्थिक और राजनीतिक साप्ताहिक, खंड XXXVII, अंक 12, 23 मार्च, पृष्ठ 1088-91
- राव, वी. एम. और डी. वी. गोपालोप्पा (2004): “कृषि विकास और किसान संकट -कर्नाटक से एक संभावित दृष्टिकोण”, आर्थिक और राजनीतिक साप्ताहिक, खंड XXXIX, अंक 52, 25 दिसंबर, पृष्ठ 5607-10.
- शेखर, सी. एस. सी. (2004): “अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय बाजारों में कृषि मूल्यों में अस्थिरता”, आर्थिक और राजनीतिक साप्ताहिक, खंड XXXIX, संख्या 43, 28 अक्टूबर, पृष्ठ 4729-36।
- कुमार, पी. और रमेश चंद (2004): “पूंजी निर्माण और कृषि विकास के निर्धारक- कुछ नए अन्वेषण”, आर्थिक और राजनीतिक साप्ताहिक, खंड XXXIX, अंक 52, 25 दिसंबर, पृष्ठ 5611-16.
- जौनपुर जिला सांख्यिकीय पत्रिका-2024, तालिका – 4 तथा Jaunpur.nic.in (जौनपुर जिले की सरकारी वेबसाइट)
- पुरी, वी० के० एन्ड मिश्र, ए०के० (2018): भारतीय अर्थव्यवस्था, पृष्ठ सं. 101
- एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी), जौनपुर, उ० प्र० की आधिकारिक वेबसाइट तथा जौनपुर, नियोजित विकास के बढ़ते कदम (2020), जिला सूचना और सम्पर्क विभाग, जौनपुर
- nic.in (जौनपुर जिले की सरकारी वेबसाइट)
![SHIKSHAN SANSHODHAN [ ISSN(O): 2581-6241 ] Peer-Reviewed, Referred, Indexed Research Journal.](https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/wp-content/uploads/SS-TITLE-HEADER.png)