ग्रामीण बालिकाओं के शैक्षणिक सशक्तिकरण में ‘‘गांव की बेटी योजना” की भूमिका
Author(s): सुशील मायदा, डॉ.मीनाक्षी पंचाल
Authors Affiliations:
2 शोधार्थी, अर्थशास्त्र विभाग, PAHER विश्वविद्यालय (उदयपुर)
2 Supervisor, अर्थशास्त्र विभाग, (PCSSH), PAHER विश्वविद्यालय (उदयपुर)
DOIs:10.2018/SS/202606001     |     Paper ID: SS202606001सारांश: शिक्षा मानव जीवन के विकास, सामाजिक परिवर्तन तथा आर्थिक उन्नति का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। किसी भी समाज की उन्नति महिलाओं की शिक्षा के बिना संभव नहीं है। भारत के ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में आज भी बालिकाओं की शिक्षा अनेक सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक बाधाओं से प्रभावित होती है। गरीबी, बाल विवाह, लैंगिक असमानता, विद्यालयों की कमी तथा जागरूकता के अभाव के कारण अनेक बालिकाएं शिक्षा पूर्ण नहीं कर पाती हैं।
इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ‘‘गांव की बेटी योजना” प्रारंभ की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की मेधावी बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना तथा आर्थिक सहायता प्रदान करना है।
प्रस्तुत शोध पत्र में ‘‘गांव की बेटी योजना” के माध्यम से बालिका शिक्षा, महिला सशक्तिकरण तथा सामाजिक परिवर्तन पर पड़े प्रभावों का अध्ययन किया गया है। इस शोध पत्र से स्पष्ट होता है कि यह योजना ग्रामीण एवं आदिवासी समाज की बालिकाओं में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने, विद्यालय त्याग दर को कम करने तथा आत्मनिर्भर बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।यह योजना महिलाओं के सामाजिक सम्मान, आर्थिक सुदृढ़ता तथा समाज में उनकी सहभागिता को बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो रही है।
सुशील मायदा, डॉ.मीनाक्षी पंचाल (2026); ग्रामीण बालिकाओं के शैक्षणिक सशक्तिकरण में ‘‘गांव की बेटी योजना” की भूमिका, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 9, Issue – 6, Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
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