15, May 2026

संपोषित ग्राम विकास एवं गांधीविचार : रचनात्मक संस्थाओ के परिप्रेक्ष्यमें अभ्यास

Author(s): डॉ. मोहंमदसईदभाई अब्दुलहकिम कुरेशी

Authors Affiliations:

Assistant Professor, Economics Department, M. R. Desai Arts and E. E. L. K. Commerce College, Chikhli

DOIs:10.2018/SS/202605005     |     Paper ID: SS202605005


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वर्तमान युग में व्यक्ति और राष्ट्र दोनों अपने विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, किन्तु इस विकास के साथ प्रकृति को नुकसान पहुंचने की समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं। विकास तो एक सही माध्यम है, लेकिन औधोगिकरण और शहरीकरण के तंत्र से न केवल मानव बल्कि प्रकृति और जीव-सृष्टि को भी खतरा है। इस समस्या का समाधान के लिए संवेदनशील ग्रामीण विकास अधिक जरूरी है, जिससे कि स्थानांतरण और शहरीकरण से उत्पन्न समस्याओं का समाधान किया जा सके। महात्मा गांधी ने ग्रामीण विकास के लिए कई रचनात्मक कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन रचनात्मक कार्यक्रमों को अपना मकसद बनाकर कई स्वैच्छिक संगठन काम कर रहे हैं, जो गांधीवादी दृष्टिकोण से प्रेरित हैं। रचनात्मक संगठनों द्वारा किए जाने वाले कार्यक्रमों को जानने और उनके माध्यम से संपोषित ग्रामीण विकास की संभावनाओं को जानने का उद्देश्य इस अभ्यास का है। यह अभ्यास गुणात्मक संशोधन पद्धति पर आधारित है। अभ्यास में ग्रामीण समस्याओं को आर्थिक, सामाजिक, संरचनात्मक, और पर्यावरणीय माध्यमों में विभाजित करके उनके निवारण के लिए संगठनों द्वारा किए जाने वाले कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला गया है। अभ्यास के नतीजे में यह प्रकट हुआ कि रचनात्मक संगठनों द्वारा संपोषित ग्रामीण विकास के विभिन्न कार्यक्रमों ने ग्रामीण आर्थिक, सामाजिक, संरचनात्मक, और पर्यावरणीय विकास को बढ़ावा दिया है।

संपोषित ग्राम विकास, रचनातमक कार्यक्रम, रचनात्मक संस्था, गांधी विचार

डॉ. मोहंमदसईदभाई अब्दुलहकिम कुरेशी (2026); संपोषित ग्राम विकास एवं गांधीविचार : रचनात्मक संस्थाओ के परिप्रेक्ष्यमें अभ्यास, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences,      ISSN(o): 2581-6241,  Volume – 9,   Issue –  5,  Available on –   https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/

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