संपोषित ग्राम विकास एवं गांधीविचार : रचनात्मक संस्थाओ के परिप्रेक्ष्यमें अभ्यास
Author(s): डॉ. मोहंमदसईदभाई अब्दुलहकिम कुरेशी
Authors Affiliations:
Assistant Professor, Economics Department, M. R. Desai Arts and E. E. L. K. Commerce College, Chikhli
DOIs:10.2018/SS/202605005     |     Paper ID: SS202605005वर्तमान युग में व्यक्ति और राष्ट्र दोनों अपने विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, किन्तु इस विकास के साथ प्रकृति को नुकसान पहुंचने की समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं। विकास तो एक सही माध्यम है, लेकिन औधोगिकरण और शहरीकरण के तंत्र से न केवल मानव बल्कि प्रकृति और जीव-सृष्टि को भी खतरा है। इस समस्या का समाधान के लिए संवेदनशील ग्रामीण विकास अधिक जरूरी है, जिससे कि स्थानांतरण और शहरीकरण से उत्पन्न समस्याओं का समाधान किया जा सके। महात्मा गांधी ने ग्रामीण विकास के लिए कई रचनात्मक कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन रचनात्मक कार्यक्रमों को अपना मकसद बनाकर कई स्वैच्छिक संगठन काम कर रहे हैं, जो गांधीवादी दृष्टिकोण से प्रेरित हैं। रचनात्मक संगठनों द्वारा किए जाने वाले कार्यक्रमों को जानने और उनके माध्यम से संपोषित ग्रामीण विकास की संभावनाओं को जानने का उद्देश्य इस अभ्यास का है। यह अभ्यास गुणात्मक संशोधन पद्धति पर आधारित है। अभ्यास में ग्रामीण समस्याओं को आर्थिक, सामाजिक, संरचनात्मक, और पर्यावरणीय माध्यमों में विभाजित करके उनके निवारण के लिए संगठनों द्वारा किए जाने वाले कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला गया है। अभ्यास के नतीजे में यह प्रकट हुआ कि रचनात्मक संगठनों द्वारा संपोषित ग्रामीण विकास के विभिन्न कार्यक्रमों ने ग्रामीण आर्थिक, सामाजिक, संरचनात्मक, और पर्यावरणीय विकास को बढ़ावा दिया है।
डॉ. मोहंमदसईदभाई अब्दुलहकिम कुरेशी (2026); संपोषित ग्राम विकास एवं गांधीविचार : रचनात्मक संस्थाओ के परिप्रेक्ष्यमें अभ्यास, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 9, Issue – 5, Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
- Benoy Krishna Hazra (December 2018) “SIGNIFICANT GANDHIAN COMMUNICATION AND ITS RELEVANCE FOR SUSTAINABLE RURAL DEVELOPMENT IN INDIA” Global Media Journal – Indian Edition, University of Calcutta, Calcutta. ISSN 2249 – 5835 Winter Issue/ December 2018 Volume: 9/ Number: 2, https://caluniv.ac.in/global-mdia-journal/SR-Dec-2018/SR1.pdf, Date- 20/12/23, 10.00 PM
- Iyengar S.(2004), “Sustainable Development and Indian Economy: Some Reflections”, the E. F. Schumacher Memorial Lecture, Nagpur University, Center for Social Studies, Surat.
- Meenu Sharma and Shikha (2016) “Exploring Gandhian Ideology for Sustainable Rural Development in India” Journal Global Values Vol- VII, No. 1, 2016, https://anubooks.com/uploads/session_pdf/pdf, Date – 21/12/23, 9.00 PM.
- Minhas Bagicha singh(1974), planning and the poor, S. Chand, New Delhi.
- कोठारी, विट्ठलदास और पटेल अंबालाल (1997) “गांधीजी का अर्थदर्शन”, गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद
- कुरेशी, मोहम्मद सईद. (2017, अप्रैल-मई)। “गांधी के आर्थिक विचार प्रेरणास्रोत एवं विचारक” नॉलेज कंसोर्टियम ऑफ गुजरात, अंक-21, अप्रैल-मई-2017, kcgjournal.org/kcg/social-science-26
- ग्राम स्वराज संघ, वार्षिक रिपोर्ट, 2017-18, 2018-19, नीलपार।
- गांधी, मोहनदास करमचंद (1941), “रचनात्मक कार्यक्रम इसका रहस्य एवं स्थान”, नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद
- गाँधी, मोहनदास (1930) अक्षरदेह, खण्ड-44, नवजीवन प्रकाशन, अहमदाबाद, पृष्ठ संख्या 103
- गांधी, मोहनदास (1942) “स्वास्थ्य की कुंजी”, नवजीवन प्रकाशन, अहमदाबाद
- गांधी, मोहनदास करमचंद (1927), “सत्य के प्रयोग”, नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद।
- गांधी, मोहनदास करमचंद (1922), “हिंद स्वराज”, नवजीवन, अहमदाबाद।
- देसाई नारायणभाई (2014), “सौना गांधी रचनात्मक कार्यक्रम”, गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद
- पाठक रामनारायण (1970), गुजरात में रचनात्मक संस्थान और सेवक, गुजरात गांधी स्मारक निधि, अहमदाबाद
- प्रभु, आरके(सं.)(1963), माई ड्रीम ऑफ इंडिया, नवजीवन, अहमदाबाद
- भट्ट चैतन्य (2011), “नोखी माटीना दीवडा”, यंग मेन्स गांधीवादी एसोसिएशन, राजकोट
- मोदी रमन (1977), “रचनात्मक कार्यक्रम का सामाजिक दर्शन”, गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद
- शाह, दशरथलाल (1988)। “आज के सन्दर्भ में रचनात्मक कार्यक्रम” नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद
- शाह, घनश्याम (1983), “गांधी चिंध्या मार्गे ग्रामीण विकास एक मूल्यांकन”, सामाजिक अध्ययन केंद्र, सूरत
- शास्त्री, आर. वी. (1983), “ग्रामीविकास नुं अर्थशास्त्र”, पॉपुलर पब्लिकेशन्स, सूरत।
- शाह, दिलीप (1988), “भारतीय ग्राम अर्थतंत्र विकासना परिप्रेक्ष्यमां”, विश्वविद्यालय ग्रंथ सूची बोर्ड, अहमदाबाद।
- शुक्ला, निमिषा और सुदर्शन, अयंगर (दूसरा संस्करण, 2014) ‘पर्यावरण अर्थशास्त्र और गांधीवादी विचार’ “पर्यावरण अर्थशास्त्र: एक परिचय”, गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद। पृष्ठ सं।
![SHIKSHAN SANSHODHAN [ ISSN(O): 2581-6241 ] Peer-Reviewed, Referred, Indexed Research Journal.](https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/wp-content/uploads/SS-TITLE-HEADER.png)