“कम्बिलिकंटत्ते कलभरणीकल” आत्मकथा में अभिव्यक्त जीवन संघर्ष
Author(s): डॉ. सांटी जोसफ
Authors Affiliations:
सह आचार्या , हिंदी विभाग , संत अलोशियस महाविद्यालय , एडत्वा , अलप्पुषा , केरल।
DOIs:10.2018/SS/202605004     |     Paper ID: SS202605004सारांश : यह एक ऐसी आत्मकथा है जो हर बार पढ़ने पर पाठक की आंखों को नम कर देती है। जीवन की अत्यंत कठिन परिस्थितियों से लड़कर हासिल की गयी जीत! जीवन के वे संघर्ष जिन्हें एक साधारण मनुष्य के लिए सह पाना मुमकिन नहीं। भले ही वे कई बार गिरे ,लेकिन माँ का सुकून उन्हें आगे जीने के लिए प्रेरित करता हैं। इस आत्मकथा में जीवन के कठिन संकटों का वास्तविक चित्रण मिलता है। साथ ही ,इसमें उन लोगों की यौन विकृतियों को भी दर्शाया गया है जो खुद को उच्च और सभ्य होने का ढोंग करते हैं। मनुष्य का जीवन एक कहानी की तरह है। मानव जीवन एक अनूठा संगम है। इसमें दुःख , संघर्ष और असफलता की कड़वाहट है, तो सुख, विजय, गर्व और शांति की मिठास भी ,अंतर बस इतना है कि हर व्यक्ति के जीवन में इनकी मात्र कम या अधिक होती है।
डॉ. सांटी जोसफ (2026); “कम्बिलिकंटत्ते कलभरणीकल” आत्मकथा में अभिव्यक्त जीवन संघर्ष, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 9, Issue – 5, Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
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