30, September 2026
भगवती चरण वर्मा के उपन्यासों में चित्रित सामाजिक जीवन
Author(s): जी भवानी
Authors Affiliations:
शोधार्थी – हिंदी विभाग, मद्रास विश्वविद्यालय, चेन्नै
DOIs:10.2018/SS/202609007     |     Paper ID: SS202609007Abstract
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आमुख: भगवती चरण वर्मा के उपन्यासों में सामाजिक जीवन का अत्यंत सजीव और यथार्थ चित्रण मिलता है। उन्होंने अपने उपन्यासों में समाज की विभिन्न समस्याओं, परंपराओं, रूढ़ियों तथा मानवीय संबंधों को गहराई से प्रस्तुत किया है। उनके साहित्य में भारतीय समाज की बदलती परिस्थितियों और मानव जीवन के संघर्षों का स्पष्ट वर्णन दिखाई देता है। भगवती चरण वर्मा ने अपने उपन्यासों में मध्यवर्गीय समाज की समस्याओं, आर्थिक असमानता, नैतिक पतन, स्त्री-पुरुष संबंध, प्रेम, विवाह तथा सामाजिक मूल्यों को प्रमुखता दी है। उनके प्रसिद्ध उपन्यास “चित्रलेखा” में पाप और पुण्य की अवधारणा के माध्यम से समाज और मानव मन का विश्लेषण किया गया है। उनके उपन्यासों में स्त्रियों की स्थिति का भी मार्मिक चित्रण मिलता है। उन्होंने समाज में महिलाओं के संघर्ष, त्याग और उनकी भावनाओं को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वासों पर भी प्रहार किया। भगवती चरण वर्मा का सामाजिक दृष्टिकोण यथार्थवादी था। वे समाज की सच्चाइयों को बिना किसी आडंबर के प्रस्तुत करते हैं। उनके उपन्यास केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाले साहित्य भी हैं। इस प्रकार, उनके उपन्यासों में सामाजिक जीवन का व्यापक और प्रभावशाली चित्रण देखने को मिलता है।
बीज शब्द: हिंदी साहित्य में भगवती चरण वर्मा, सामाजिक दृष्टिकोण, राजनीतिक दृष्टिकोण, सांस्कृतिक दृष्टिकोण।
जी भवानी (2026); भगवती चरण वर्मा के उपन्यासों में चित्रित सामाजिक जीवन, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 9, Issue – 9, Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
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