30, April 2026
पर्यावरण चिंतन : मलयालम उपन्यास एनमकजे और हिंदी उपन्यास मरंग गोड़ा नीलकंठ हूआ के विशेष संदर्भ में
Author(s): निर्मला . ए
Authors Affiliations:
Assistant professor, Guest faculty Department of Hindi, NSS College Nemmara, India
DOIs:10.2018/SS/202604005     |     Paper ID: SS202604005Abstract
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सारांश: अम्बिकासुतन मंगाड का उपन्यास 'एनमकजे 'केरल के कासरगोड जिले में स्थित गाँवों के वास्तविक घटना पर आधारित है। साहित्य समाज का दर्पण है ।उसी तरह छत्तीसगढ़ के 'जादूगोडा 'नामक गाँव और आस पास के क्षेत्रों के घुटन भरी जिन्दगी से जूझते हुए मानव और पशु पक्षियों का जीवंत दस्तावेज है।दोनों उपन्यासों के उद्देश्य उपन्यासों के माध्यम से विकास की उस विभीषिका का विश्लेषण करना है, जो मनुष्य और प्रकृति के संबंधों को शत्रुतापूर्ण बना रही है।
मुख्य शब्द: पर्यावरण , पारिस्थितिकी आलोचना, औद्योगिक त्रासदी, पर्यावरण विमर्श, एंडोसल्फान, रेडियोधर्मी प्रदूषण, जादूगोड़ा और कासरगोड ।
निर्मला . ए (2026); पर्यावरण चिंतन : मलयालम उपन्यास एनमकजे और हिंदी उपन्यास मरंग गोड़ा नीलकंठ हूआ के विशेष संदर्भ में, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 9, Issue – 4, Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
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