30, September 2026
‘नमस्ते समथर’ उपन्यास का शिल्प विधान और भाषिक संरचना
Author(s): श्री हेमेन्द्र कुमार, डॉ. बीरेन्द्र कुमार शर्मा
Authors Affiliations:
COLLEGE NAME – इंस्टिट्यूट ऑफ़ ओरिएण्टल फिलॉसफी
वृन्दावन, मथुरा (उत्तरप्रदेश)
UNIVERSITY – डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा
DOIs:10.2018/SS/202609009     |     Paper ID: SS202609009Abstract
Keywords
References
मैत्रेयी पुष्पा हिन्दी के समकालीन कथा-साहित्य में अपनी अलग पहचान रखती हैं | अपने नये उपन्यास ‘नमस्ते समथर’ (2021ई.) के माध्यम से भी कुछ ऐसा ही करती हैं | इस उपन्यास में वे न सिर्फ साहित्यिक संस्थाओं के भीतर गहराई तक फैले पितृसत्ता और लैंगिक राजनीति पर सीधा वार करती हैं, बल्कि इस उपन्यास के द्वारा इसकी भाषा और शिल्प का भी बेजोड़ नमूना प्रस्तुत करती हैं | 'नमस्ते समथर' के कथानक की खूबियाँ, इसकी बनावट और भाषा-शैली का करीब से मूल्यांकन करने पर पता चलता है कि मैत्रेयी जी यहाँ सीधे वर्णन पर नहीं रुकतीं अपितु उनका शिल्प नाटक, आत्मसंस्मरण और विश्लेषण इन सबका दिलचस्प मेल बनाता है | उपन्यास की भाषा सिर्फ बातचीत या विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहती | इसमें बुंदेलखंड की मिट्टी की खुशबू भी है और प्रतिरोध बहस की तीक्ष्ण धार भी |
नमस्ते समथर, शिल्प विधान, भाषिक संरचना, आंचलिकता, संवादात्मकता
संदर्भ ग्रंथ सूची
- तिवारी, रामचंद्र; हिंदी का गद्य साहित्य, विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी; पृष्ठ – 412
- पुष्पा, मैत्रेयी ‘नमस्ते समथर’ (2021), प्रथम संस्करण, राजकमल प्रकाशन दरियागंज, नई दिल्ली – पृष्ठ संख्या – 32
- पुष्पा, मैत्रेयी ‘नमस्ते समथर’ (2021), प्रथम संस्करण, राजकमल प्रकाशन दरियागंज, नई दिल्ली – पृष्ठ संख्या -25
- पुष्पा, मैत्रेयी ‘नमस्ते समथर’ (2021), प्रथम संस्करण, राजकमल प्रकाशन दरियागंज, नई दिल्ली – पृष्ठ संख्या – 15
- पुष्पा, मैत्रेयी ‘नमस्ते समथर’ (2021), प्रथम संस्करण, राजकमल प्रकाशन दरियागंज, नई दिल्ली – पृष्ठ संख्या – 10
- पुष्पा, मैत्रेयी ‘नमस्ते समथर’ (2021), प्रथम संस्करण, राजकमल प्रकाशन दरियागंज, नई दिल्ली – पृष्ठ संख्या – 135
- पुष्पा, मैत्रेयी ‘नमस्ते समथर’ (2021), प्रथम संस्करण, राजकमल प्रकाशन दरियागंज, नई दिल्ली – पृष्ठ संख्या – 142
- पुष्पा, मैत्रेयी ‘नमस्ते समथर’ (2021), प्रथम संस्करण, राजकमल प्रकाशन दरियागंज, नई दिल्ली – पृष्ठ संख्या – 130
- पुष्पा, मैत्रेयी ‘नमस्ते समथर’ (2021), प्रथम संस्करण, राजकमल प्रकाशन दरियागंज, नई दिल्ली – पृष्ठ संख्या – 128
![SHIKSHAN SANSHODHAN [ ISSN(O): 2581-6241 ] Peer-Reviewed, Referred, Indexed Research Journal.](https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/wp-content/uploads/SS-TITLE-HEADER.png)