हिन्दी बालसाहित्य में नैतिक मूल्यों का संकट : आधुनिक दृष्टिकोण से अध्ययन
Author(s): डॉ. ज्योति सिंह
Authors Affiliations:
हिंदी विभागाध्यक्ष, रामपाल सिंह सत्यवती देवी मेमोरियल महाविद्यालय, दातागंज, बदायूं, उत्तर प्रदेश
DOIs:10.2018/SS/202512001     |     Paper ID: SS202512001शोध सार : हिन्दी बालसाहित्य भारतीय सांस्कृतिक चेतना का वह क्षेत्र है जो नन्हे-मुन्ने बालकों के मानसिक, नैतिक एवं बौद्धिक विकास में सहा,यक होता है। परन्तु आज के तकनीकी, उपभोक्तावादी और प्रतिस्पर्धात्मक समाज में बालसाहित्य के नैतिक आधार पर संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यह शोध-पत्र आधुनिक युग में बालसाहित्य के नैतिक पक्ष के ह्रास के कारणों, उसके प्रभावों तथा सम्भावित समाधानों का अध्ययन प्रस्तुत करता है। आधुनिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह संकट केवल साहित्यिक नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षिक दोनों स्तरों पर गहराया है। इस अध्ययन में परम्परागत और आधुनिक बालसाहित्य की तुलनात्मक समीक्षा के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि नैतिकता, संवेदना और मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना के बिना बालसाहित्य का वास्तविक उद्देश्य अधूरा रहेगा।
डॉ. ज्योति सिंह (2025); हिन्दी बालसाहित्य में नैतिक मूल्यों का संकट : आधुनिक दृष्टिकोण से अध्ययन, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 8, Issue – 12, Pp. 1-6. Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
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