स्नातक स्तर के विद्यार्थियों में सामाजिक परिपक्वता का उनके सामाजिक – आर्थिक स्तर के संदर्भ में अध्ययन
Author(s): Dr. Vibha Yadav
Authors Affiliations:
Assistant Professor, B.Ed. Department, Mahila Vidyalaya Degree College, Lucknow, Uttar Pradesh, India
DOIs:10.2018/SS/202607003     |     Paper ID: SS202607003किसी व्यक्ति की सामाजिक-आर्थिक अवस्था समाज के लोगों में उसकी प्रतिष्ठा, इज्ज़त और ताकत (आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षिक आदि) को कहते हैं। यह मूल्यांकन से सम्बंधित एक विषय है जो यह बताता है कि कोई व्यक्ति सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से कितना समृद्ध है। यह उसके जीवन स्तर और सोच को भी दर्शाता है। सामाजिक-आर्थिक स्थिति शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ ही साथ समग्र मानव कामकाज को भी प्रभावित करता है। यह धन, आय के वितरण में असमानता के रूप में सामाजिक-आर्थिक स्थिति में विचरण और संसाधनों का प्रयोग अंततः हर किसी को प्रभावित कर सामाजिक समस्याओं को उत्पन्न करते हैं। अतः सामाजिक आर्थिक असमानता और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में घनिष्ठ अंतराल को कम करने का प्रयास अत्यधिक लाभदायी होगा। सामाजिक-आर्थिक स्तर का प्रभाव, बच्चों पर, उनके परिवार तथा समाज पर सकारात्मक रूप से पड़ता है। यह बच्चे को सामाजिक परिपक्वता की ओर अग्रसर करते हैं। उपरोक्त अध्ययन स्नातक स्तर के विद्यार्थियों में सामाजिक परिपक्वता का उनके सामाजिक-आर्थिक स्तर के सन्दर्भ में अध्ययन करने हेतु प्रेरित करती है। जिससे विद्यार्थी स्वयं के सामाजिक-आर्थिक स्तर को उच्च उठाने तथा सामाजिक रूप से परिपक्व होने में सक्षम हो सके।
Dr. Vibha Yadav (2026); स्नातक स्तर के विद्यार्थियों में सामाजिक परिपक्वता का उनके सामाजिक – आर्थिक स्तर के संदर्भ में अध्ययन, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 9, Issue – 7, Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
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