15, December 2025

सांख्य दर्शन में प्रकृति-पुरुष सिद्धान्त की समीक्षा

Author(s): 1 डॉ. विनोद कुमार राय, 2 डॉ. वन्दना कुमारी

Authors Affiliations:

1सहायक प्राध्यापक (सीनियर स्केल), स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग, एस.एस. कॉलेज, जहानाबाद, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया, बिहार।  Email: royvinodkumar@gmail.com

2वरीय व्याख्याता, डायट (जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान), सोनपुर, सारण, बिहार। Email: vandana.roy8@gmail.com

DOIs:10.2018/SS/202512002     |     Paper ID: SS202512002


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शोध सार: सांख्य दर्शन भारतीय तत्त्वमीमांसा की एक प्रमुख शाखा है जो सृष्टि, चेतना और प्रकृति के मूलाधार को विवेचित करती है। कपिल मुनि द्वारा प्रतिपादित यह दर्शन द्वैतवादी है, जिसमें पुरुष (चेतन तत्व) और प्रकृति (अचेतन तत्व) को - दो अनादि और स्वतंत्र तत्त्वों के रूप में स्वीकार किया गया है। प्रस्तुत शोध पत्र प्रकृति-पुरुष सिद्धान्त की तात्त्विक संरचना, उसकी तार्किक समीक्षा, अन्य दर्शनों के साथ तुलना, तथा आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसकी प्रासंगिकता का विश्लेषण प्रस्तुत करता है।    
मुख्य शब्द: सांख्य दर्शन, प्रकृति, पुरुष, द्वैतवाद, तत्त्वमीमांसा, कपिल मुनि, मोक्ष।

डॉ. विनोद कुमार राय, डॉ. वन्दना कुमारी (2025); सांख्य दर्शन में प्रकृति-पुरुष सिद्धान्त की समीक्षा, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences,      ISSN(o): 2581-6241,  Volume – 8,   Issue –  12,  Pp. 7-12.       Available on –   https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/


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