30, April 2026

संग्रहालय, स्मारक और राष्ट्रीय पहचान का निर्माण (औपनिवेशिक भारत से समकालीन भारत तक ऐतिहासिक स्मृति की राजनीति का एक अध्ययन)

Author(s): कृष्ण कुमार सिंह

Authors Affiliations:

अतिथि प्रवक्ता (इतिहास विभाग),

कालिंदी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय नई दिल्ली

DOIs:10.2018/SS/202604017     |     Paper ID: SS202604017


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सार (Abstract):  यह शोध-पत्र भारत के संदर्भ में संग्रहालयों और स्मारकों की उस भूमिका का विश्लेषण करता है जो उन्होंने राष्ट्रीय पहचान की परिकल्पना और निर्माण में निभाई है। बेनेडिक्ट एंडरसन द्वारा प्रस्तुत “कल्पित समुदाय” की अवधारणा को आधार बनाते हुए यह पत्र दर्शाता है कि किस प्रकार औपनिवेशिक पुरातत्व-सर्वेक्षण ने प्राचीन स्मारकों और मूर्तियों को वैज्ञानिक वर्गीकरण की वस्तुओं में बदला, और स्वाधीनता के पश्चात राष्ट्र-राज्य ने इन्हीं वस्तुओं को सांस्कृतिक निरंतरता और एकता के प्रतीकों के रूप में पुनः व्याख्यायित किया। ताप्ती गुहा-ठाकुरता, नयनजोत लाहिड़ी, कविता सिंह, पार्थ चटर्जी तथा रोमिला थापर जैसे इतिहासकारों के कार्यों के आधार पर यह पत्र राष्ट्रीय संग्रहालय (नई दिल्ली), भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और सोमनाथ जैसे विवादित स्मारकों के मामलों की परीक्षा करता है। निष्कर्षतः यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि संग्रहालय और स्मारक तटस्थ ऐतिहासिक अवशेष नहीं, बल्कि सत्ता, स्मृति और पहचान की निरंतर विवादास्पद प्रक्रिया के सक्रिय स्थल हैं।

कूट-शब्द (Keywords): संग्रहालय, स्मारक, राष्ट्रीय पहचान, पुरातत्व, औपनिवेशिकता, स्मृति की राजनीति ।

कृष्ण कुमार सिंह  (2026); संग्रहालय, स्मारक और राष्ट्रीय पहचान का निर्माण (औपनिवेशिक भारत से समकालीन भारत तक ऐतिहासिक स्मृति की राजनीति का एक अध्ययन), Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences,      ISSN(o): 2581-6241,  Volume – 9,   Issue –  4,  Available on –   https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/


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