14, September 2026

वाराणसी क्षेत्र में कृषि विकास और सिंचाई संसाधनों में स्थानिक असमानताएँ: समस्याओं, जल-सततता और समाधान का भौगोलिक अध्ययन

Author(s): 1. प्रिंस कुमार सिंह, 2. प्रो. विनीत नारायण दुबे

Authors Affiliations:

1भूगोल विभाग, श्री मुरली मनोहर टाउन पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज

2सम्बद्ध- जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया, उत्तर प्रदेश

DOIs:10.2018/SS/202609002     |     Paper ID: SS202609001


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शोध-सार

वाराणसी जनपद की कृषि गंगा के मध्य मैदानी क्षेत्र की जलोढ़ मिट्टी, उच्च कृषि भूमि उपयोग और व्यापक सिंचाई सुविधा पर आधारित है, लेकिन कृषि विकास का लाभ हर विकासखण्ड में अलग-अलग नहीं है। सिंचाई संसाधनों के स्थानिक वितरण, नलकूप-निर्भरता, भूजल-सततता, प्राकृतिक जोखिम और जल-प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं का भौगोलिक विश्लेषण प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य है। यह अध्ययन मुख्यतः ICAR-CRIDA के जिला कृषि आकस्मिकता प्रतिवेदन, वाराणसी की सिंचाई स्थिरता पर प्रकाशित अध्ययनों, भूजल संबंधी अध्ययनों और भारत जल प्रभाव सम्मेलन के वाराणसी संबंधी विस्तृत विवरण पर आधारित है। ICAR-CRIDA के अनुसार, राज्य में 95.748 हेक्टेयर शुद्ध बोया गया क्षेत्र और 82.206 हेक्टेयर शुद्ध सिंचित क्षेत्र था। फसल सघनता 176 प्रतिशत थी (ICAR-CRIDA, 2012, p. 2)। सिंचाई में नलकूपों का बड़ा प्रभाव स्रोत-वार आंकड़े बताते हैं। विकासखण्ड स्तर पर भी नहरों, राजकीय नलकूपों और निजी नलकूपों की भूमिका में स्पष्ट अंतर था (Kumar & Rai, 2017, p. 57)। अध्ययन ने पाया कि वाराणसी की कृषि समस्या सिर्फ सिंचाई की मात्रा की नहीं है। इसकी वजह असमान जल-स्रोतों की संरचना, भूजल पर बहुत अधिक निर्भरता और संसाधनों तक असमान पहुँच है। टिकाऊ समाधान के लिए सूक्ष्म सिंचाई, फसल विविधीकरण, भूजल पुनर्भरण, वर्षाजल संचयन, नहरों और स्थानीय जलाशयों का पुनर्जीवन और विकासखण्ड-विशिष्ट कृषि नियोजन आवश्यक हैं।

मुख्य शब्दावली: कृषि विकास, भूजल, जल-सततता, स्थानिक असमानता, वाराणसी

प्रिंस कुमार सिंह, प्रो. विनीत नारायण दुबे.  (2026);  वाराणसी क्षेत्र में कृषि विकास और सिंचाई संसाधनों में स्थानिक असमानताएँ: समस्याओं, जल-सततता और समाधान का भौगोलिक अध्ययन, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences,      ISSN(o): 2581-6241,  Volume – 9,   Issue –  9,  Available on –   https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/

संदर्भ सूची

  1. ICAR-Central Research Institute for Dryland Agriculture. (2012). Agriculture contingency plan for district: Varanasi, Uttar Pradesh. Indian Council of Agricultural Research.
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  4. Ram, P., & Raju, N. J. (2016). Ground water sustainability in Varanasi district, Uttar Pradesh: Current situation and need for effective strategies. In N. J. Raju (Ed.), Geostatistical and geospatial approaches for the characterization of natural resources in the environment: Challenges, processes and strategies (pp. 275–279). Springer. https://doi.org/10.1007/978-3-319-18663-4_42 (ResearchGate)

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