महिला सशक्तिकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता: शिक्षा का नया परिदृश्य
Author(s): प्रियांशु आसेन, डा0 प्रनिता सिंह
Authors Affiliations:
1शोधार्थी, शिक्षाशास्त्र, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ उ0प्र0
2प्रोफेसर, शिक्षाशास्त्र विभाग, आचार्य नरेन्द्र देव टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, सीतापुर, सहसंयुक्त लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ उ0प्र0
DOIs:10.2018/SS/202511009     |     Paper ID: SS202511009सारांश : महिला सशक्तिकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के पारस्परिक संबंधों का विश्लेषण करते हुए यह समझना है कि एआई शिक्षा प्रणाली महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक विकास में किस प्रकार सहायक सिद्ध हो रही है। 21वीं सदी में एआई ने शिक्षा, रोजगार, नेतृत्व और उद्यमिता के क्षेत्र में और संभावनाएं उत्पन्न की है। एआई आधारित शिक्षा प्रणालियां जैसे- वर्चुअल क्लासरूम, पर्सनललाइज्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म और अनुकूलनशील शिक्षण में महिलाओं को स्थान, समय और भाषा के सीमाओं से मुक्त कर नई शिक्षा संभावनाएं प्रदान की है। ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों की महिलाएं अब एआई की मदद से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल कौशल और ऑनलाइन रोजगार के अवसरों तक पहुंच बना रही हैं। साथ ही एआई आधारित उद्यमिता मॉडल जैसे डिजिटल मार्केटिंग, डाटा एनालिटिक्स और ई-कॉमर्स प्लेटफार्म महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहे हैं। हालांकि डिजिटल विभाजन, लिंग असमानता, साइबर सुरक्षा और एल्गोरिदमिक पक्षपात जैसी चुनौतियां इस परिवर्तन के मार्ग में अवरोध उत्पन्न करती हैं। इनसे निपटने के लिए नीति-निर्माताओं को जेंडर-सेंसिटिव एआई नीति, डाटा गोपनीयता डिजिटल साक्षरता और महिला-केंद्रित एआई प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। भारत सरकार की “एआई फॉर ऑल”, “डिजिटल इंडिया” और “वूमेन एंटरप्रेन्योरशिप प्लेटफार्म” जैसी पहल इस दिशा में सकारात्मक प्रयास है। महिला सशक्तिकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समन्वय शिक्षा को नया परिदृश्य प्रदान करता है, जहां महिलाएं न केवल ज्ञान अर्जन में सक्षम हो रही है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। यह आलेख भविष्य के उस समाज की कल्पना प्रस्तुत करता है जहां एआई आधारित शिक्षा के माध्यम से लैंगिक असमानता और सतत विकास के लक्ष्य साकार हो सकते हैं।
प्रियांशु आसेन, डा0 प्रनिता सिंह (2025); महिला सशक्तिकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता: शिक्षा का नया परिदृश्य, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 8, Issue – 11, Pp. 51-60. Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
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