8, April 2026

‘कम्बिलिकंटत्ते कलभरणीकल’ आत्मकथा में अभिव्यक्त नारी अस्मिता

Author(s): डॉ. सांटी जोसफ

Authors Affiliations:

सह आचार्या , हिंदी विभाग , संत अलोशियस महाविद्यालय , एडत्वा , अलप्पुषा , केरल।

DOIs:10.2018/SS/202604001     |     Paper ID: SS202604001


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सारांश :  भारत के दक्षिणी छोर पर स्थित एक राज्य केरल है। भारत के अन्य हिस्सों की तरह ,केरल में भी समाज में पुरुषों का ही प्रथम स्थान है। हालाँकि भारत में कुछ ऐसे राज्य हैं जहां लड़कियों के जन्म लेते ही उन्हें मार दिया जाता है ,लेकिन केरल में लड़कियों को कभी नहीं मारा जाता। इसके बावजूद समाज में महिलाओं को हमेशा दूसरा स्थान ही मिलता है। लेकिन लड़का पैदा न होने के कारण पति और उसके परिवारवाले हमेशा ताने देते रहते हैं। कुछ लोग तो यहां तक मानते है कि लड़का न होना किसी शाप की वजह से है । अगर उन्हें इसके पीछे का विज्ञान समझाया जाये , तो वे उसे स्वीकार नहीं करते और न ही समझने की कोशिश करते हैं। भले ही महिला सशक्तिकरण की  गतिविधियां आज बहुत सक्रीय हैं ,फिर भी परिवारों में आज भी पुरुषों  का ही वर्चस्व बना हुआ है। आज की नारी  आत्मविश्वास और सपनों से भरी हुई हैं। वह अपनी अस्मिता को पहचान रही हैं। लेकिन अक्सर ऐसा तब होता है जब वे प्रतिकूल परिस्थितियों या संकटों में फंसी होती हैं।  इस आत्मकथा में हम एक ऐसी माँ को देखते हैं ,जो जिन्दगी भर पतिव्रता है, जिसने दृढ़ निश्चय के साथ सभी कष्टों और दुखों का सामना करते हुए अपने चार बच्चों के भविष्य का निर्माण किया।    
मुख्य शब्द : अकेला , कठिनाईयां , माँ , अस्मिता। 

डॉ. सांटी जोसफ  (2026); ‘कम्बिलिकंटत्ते कलभरणीकल’ आत्मकथा में अभिव्यक्त नारी अस्मिता, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences,      ISSN(o): 2581-6241,  Volume – 9,   Issue –  4,  Available on –   https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/


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