लोकगीतों से इतिहास संरक्षण: वीर राम सिंह पठानिया की वार का अध्ययन
Author(s): डॉ. कविता कटोच
Authors Affiliations:
सहायक आचार्य, संगीत
राजकीय महाविद्यालय सैंज
DOIs:10.2018/SS/202603005     |     Paper ID: SS202603005
भारत के इतिहास में वीर राम सिंह पठानिया नूरपुर क्षेत्र के ऐसे शौर्य-पुरुष हुए हैं, जिनका नाम ऐतिहासिक दस्तावेज़ों से लेकर जनमानस की स्मृतियों में लोकगीतों के माध्यम से आज भी जीवंत है। वीर राम सिंह पठानिया ने ब्रिटिश सत्ता के अन्यायपूर्ण शासन के विरुद्ध अदम्य साहस, रणकौशल और आत्मबल का परिचय दिया। नूरपुर अंचल में प्रचलित लोकगीत “कोई किल्ला वजीर खूब लड़ेया” वीर राम सिंह पठानिया की वीरता और शौर्य का सशक्त प्रमाण है। यह लोकगीत लोक मन की अभिव्यक्ति के साथ-साथ इतिहास को संजोने का एक भी एक प्रभावी माध्यम है। इस लोकगीत के द्वारा समाज ने अपने वीर नायक की स्मृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया है। लोकगीतों की मौखिक परंपरा ने लिखित इतिहास के अभाव में भी वीर राम सिंह पठानिया के संघर्ष, बलिदान और राष्ट्रप्रेम को जीवंत बनाए रखा है। वीर रस से ओतप्रोत यह लोकगीत जनता की सामूहिक चेतना को प्रतिबिंबित करता है और दर्शाता है कि किस प्रकार लोक साहित्य इतिहास संरक्षण का एक सशक्त उपकरण बनता है। लोकगायक, ग्रामीण समाज और सांस्कृतिक परम्पराएं मिलकर वीर राम सिंह पठानिया को श्रद्धांजलि अर्पित करती रही हैं। इस प्रक्रिया में लोकगीतों ने केवल अतीत का स्मरण ही नहीं कराया, बल्कि समाज में वीरता, स्वाभिमान और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा भी दी है। प्रस्तुत शोध पत्र में भारत के स्वतंत्रता संग्राम में वीर राम सिंह पठानिया के योगदान और लोकगीत “कोई किल्ला वजीर खूब लड़ेया” की भूमिका का विश्लेषण करने का प्रयास किया गया है।
डॉ. कविता कटोच (2026); लोकगीतों से इतिहास संरक्षण: वीर राम सिंह पठानिया की वार का अध्ययन, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 9, Issue – 3, Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
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