महर्षि वाल्मीकि के राम : एक “जीवन दृष्टि ” ;
Author(s): डॉ.वन्दना मिश्रा
Authors Affiliations:
असिस्टेंट प्रो0 –संस्कृत–विभाग, संत तुलसीदास पी0 जी0 कालेज,कादीपुर,सुल्तानपुर (U.P.).
DOIs:10.2018/SS/202601017     |     Paper ID: SS202601017वाल्मीकि रामायण में, राम को एक आदर्श मानव के रूप में चित्रित किया गया है, जिन्हें 'मर्यादा पुरुषोत्तम' कहा जाता है। वाल्मीकि की जीवन-दृष्टि में, राम केवल एक दिव्य अवतार नहीं, बल्कि एक ऐसा चरित्र हैं जो धर्म, कर्तव्य और नैतिकता के उच्चतम मानकों को स्थापित करते हैं। वाल्मीकि की जीवन-दृष्टि में राम एक ऐसे मार्गदर्शक हैं जो सिखाते हैं कि जीवन में धर्म, त्याग, करुणा और न्याय के पथ पर चलकर एक आदर्श और गरिमापूर्ण जीवन कैसे जिया जा सकता है, भले ही इसके लिए बड़े व्यक्तिगत बलिदान देने पड़ें।तुलसीदास के राम जहाँ साक्षात् ईश्वर हैं, वहीं वाल्मीकि के राम मानवीय भावनाओं (दुख, क्रोध, विरह) से युक्त हैं। वे सीता के खोने पर विलाप करते हैं और सामान्य मनुष्यों की तरह संघर्ष करते हैं, जो यह सिखाता है कि एक मनुष्य अपने आचरण से कैसे 'देवत्व' प्राप्त कर सकता है।
डॉ. वन्दना मिश्रा (2026); महर्षि वाल्मीकि के राम : एक ‘जीवन-दृष्टि’ , Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 9, Issue – 1, Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
सन्दर्भ-ग्रन्थ-सूची :
- मनुस्मृति-6/92
- कणादसूत्र-1/2
- वाल्मीकि रामायण-2/21/41
- वाल्मीकि रामायण-3/37/13
- वाल्मीकि रामायण-2/21/58
- वाल्मीकि रामायण-2/39/20-21
- https://www.aryasamaj.co.in/wp-content/uploads/2023/07/MaryadaPurushottamShriramKaPrerakSwaroo
- https://hindi.webdunia.com/religion/religion/hindu/ramcharitmanas/valmeeki.htm
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