भोजपुरी साहित्य में व्यक्त प्रवसन के सांस्कृतिक अध्ययन
Author(s): यशवंत कुमार सिंह
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शोधछात्र, स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग, वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा
DOIs:10.2018/SS/202504009     |     Paper ID: SS202504009शोध-सारांश: आज भोजपुरी भारत की सीमाओं में ही आबद्ध नहीं है, अपितु भारत के बाहर मॉरीशस, फ़िजी, त्रिनिडाड, सूरीनाम, गुयाना, एवं नेपाल के बहुसंख्यक लोगों की मातृभाषा बनी हुई है | भोजपुरी क्षेत्र अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराओं के कारण प्राचीन काल से ही विख्यात रहा है | लोक कला एवं लोक संस्कृति के दृष्टि से यह अत्यंत समृद्ध क्षेत्र है | भोजपुरी संस्कृति ही अपने आप में पूर्ण, स्वस्थ व गहरी है | भोजपुरी क्षेत्र में निवास करने वाला हर व्यक्ति, हर प्राणी एक सांस्कृतिक सूत्र में बंधा विराट तत्व का ही एक रूप है | यह देश-विदेश कहीं भी जाता है, अपना सांस्कृतिक धरोहर को साथ ले जाता है | भोजपुरिया समाज अपना समरस समाज और समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराओं के कारण पूरे विश्व में जाना जाता है | भोजपुरिया क्षेत्र से जीतने भी मजदूर प्रवास के लिए देश या विदेश गये हैं, वे अपने सभ्यता-संस्कृति को आज भी संजोए हुए हैं |
यशवंत कुमार सिंह (2025); भोजपुरी साहित्य में व्यक्त प्रवसन के सांस्कृतिक अध्ययन, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 8, Issue – 4., Pp.52-55. Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
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