‘नवयुग’: संघर्ष से सृजन तक – एक साहित्यिक चेतना का पुनर्जन्म
Author(s): डेनियल राजेश, डॉ.एल.तिल्लै सेल्वी,
Authors Affiliations:
शोधार्थी, हिन्दी विभाग, अण्णामलै विश्वविद्यालय, अण्णामलै नगर – 608 002.
आचार्या, हिन्दी विभाग, अण्णामलै विश्वविद्यालय, अण्णामलै नगर – 608 002.
DOIs:10.2018/SS/202601003     |     Paper ID: SS202601003शोध सार: साहित्य और समाज एक-दूसरे से अटूट रूप से जुड़े हुए हैं। साहित्य समाज का प्रतिबिंब होता है और समाज के कल्याण में सहायक सिद्ध होता है। हिंदी कहानी विधा में साहित्य की विशेष भूमिका रही है। हिंदी साहित्य के आकाश में अनेक कहानीकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से इस विधा को समृद्ध किया है। इन्हीं में से एक हैं प्रसिद्ध कहानीकार तेजेन्द्र शर्मा, जिन्होंने हिंदी कहानी साहित्य में महत्वपूर्ण और बेजोड़ योगदान दिया है। तेजेन्द्र शर्मा की कहानी ‘नवयुग’ एक मार्मिक रचना है, जो साहित्यिक संसार की कड़वी सच्चाइयों, एक लेखक के संघर्ष, प्रतिष्ठा की होड़ और आत्म-परिवर्तन को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। ‘नवयुग’ आत्म-मंथन और नैतिक मूल्यों पर पुनर्विचार के लिए प्रेरित करती है।
डेनियल राजेश, डॉ.एल.तिल्लै सेल्वी, (2025); ‘नवयुग’: संघर्ष से सृजन तक – एक साहित्यिक चेतना का पुनर्जन्म, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 9, Issue – 1, Pp.13-17. Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
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