गदर आंदोलन के प्रणेता : लाला हरदयाल
Author(s): रमेश कुमार सिंह
Authors Affiliations:
शोध छात्र, इतिहास विभाग , दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय , गोरखपुर
DOIs:10.2018/SS/202601004     |     Paper ID: SS202601004शोध सार : भारत लाला हरदयाल के प्रति कृतज्ञता का ऋणी है। उन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए जो कुछ किया, उसे आज भी उचित रूप से स्वीकार किया जाना बाकी है। विरोधाभासों से ग्रस्त हरदयाल एक मनमौजी आदर्शवादी, बुद्धिजीवी थे, जो भारत और अमेरिका में जनता के साथ लगभग रहस्यमय सहानुभूति महसूस करते थे। उन्होंने न केवल भारत में बल्कि बाहर भी राष्ट्रीय स्वतंत्रता की लौ जलाए रखी। 1905 में वे शैक्षणिक गतिविधियों के लिए इंग्लैंड गए। लेकिन कुछ वर्षों के बाद उन्होंने अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए इंग्लैंड छोड़ दिया। वे 25 वर्षों तक अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों में रहे और अंततः इंग्लैंड लौट आए, जहाँ उन्होंने तीन पुस्तकें लिखीं। हरदयाल का कद इतना बड़ा था कि उन्हें एक ही ढाँचे में रखना बहुत मुश्किल है। वे दूरदर्शी थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन बोधि सत्व सिद्धांत, धर्मों की तर्कसंगत व्याख्या और आत्म-संस्कृति के विकास के लिए अपने पांडित्यपूर्ण ज्ञान को साझा करने में समर्पित कर दिया। प्रस्तावित शोध-पत्र इंग्लैंड में बौद्धिक गतिविधियों में उनके लौटने के उद्देश्य की जाँच करना चाहती है। साथ ही शोध-पत्र में उनके कार्यों की समकालीन प्रासंगिकता का भी विश्लेषण किया गया है, जिसमें मानवतावाद, बुद्धिवाद और वैज्ञानिक सोच का एक सामान्य सूत्र था। उनके विचारों की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही जीवंत है जितनी सालो पहले थी। वे सच्चे देशभक्त थे । जिन्होंने अपने देश के लिए स्वतंत्रता का सपना देखा था। वे आम लोगों में विज्ञान और युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के अग्रदूत थे।
रमेश कुमार सिंह (2025); गदर आंदोलन के प्रणेता : लाला हरदयाल, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 9, Issue – 1, Pp.18-24. Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
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