भारतीय ज्ञान परंपरा में औषधि ज्ञान
Author(s): रीनू वर्मा , डॉ.झेनामाबीबी कादरी
Authors Affiliations:
रीनू वर्मा
शोध छात्रा: इतिहास एवं संस्कृति विभाग
गूजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद, गुजरात
शोध निर्देशिका: डॉ.झेनामाबीबी कादरी,
सह प्राध्यापक
इतिहास एवं संस्कृति विभाग
गूजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद, गुजरात
DOIs:10.2018/SS/202607017     |     Paper ID: SS202607017सार :
भारत देश जिसकी भूमि ज्ञान की भूमि है। भारतीय ज्ञान परंपरा में जिसमें ज्ञान व विज्ञान का समन्वय है। भारतीय ज्ञान परंपरा प्राचीन समय से ही समृद्ध रही है। इस ज्ञान परंपरा में शिक्षा प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। जिसमें प्राचीन समय में राजनीतिक, शौर्य, शास्त्रों, तथा चिकित्सा आदि का अध्ययन समाहित था। ये ज्ञानपरंपरा वेदों से होते हुए ऋषि- महर्षि से धीरे धीरे आने वाली पीढ़ियों अलग-अलग माध्यम से हस्तांतरित होते हुए, अपनी वर्तमान समय मे भी महत्ता बनाएं हुए है। भारतीय ज्ञान का सर्वप्रथम प्रकाश वेदों से मिलता है। इन वेदों मे ज्ञान के सभी क्षेत्रों का ज्ञान सम्मिलित हैं। इसी क्रम में इसमे आरोग्य हेतु औषधीय ज्ञान भी है। आरोग्य हेतु औषधि की आवश्यकता होती है, जिसके हेतु औषधि ज्ञान का विकास हुआ। इसी ज्ञान को इस लेख के द्वारा उल्लेखित किया जाएगा ।
रीनू वर्मा , डॉ.झेनामाबीबी कादरी (2026); भारतीय ज्ञान परंपरा में औषधि ज्ञान, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 9, Issue – 7, Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
संदर्भ सूची:
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