राम कथा में स्त्री चिंतन व स्वरूप
Author(s): डॉ. भावना
Authors Affiliations:
असिस्टेंट प्रोफेसर, हुकुम सिंह बोरा राजकीय परास्नातक महाविद्यालय, सोमेश्वर, उत्तराखंड।
DOIs:10.2018/SS/202607010     |     Paper ID: SS202607010सारांश: प्रस्तुत शोधपत्र में रामकथा के विभिन्न स्त्री पात्रों के वैचारिक चिंतन, चारित्रिक स्वरूप और उनकी समकालीन प्रासंगिकता का विश्लेषण किया गया है। रामकथा के स्त्री पात्र—जैसे सीता, उर्मिला, कौशल्या, सुमित्रा, कैकयी और मंदोदरी—त्याग, सहिष्णुता, कर्तव्यपरायणता, विवेक और वात्सल्य जैसे उच्च भारतीय मूल्यों से परिपूर्ण हैं। जहाँ सीता और उर्मिला पतिव्रत धर्म और लोकोत्तर त्याग की प्रतिमूर्ति हैं, वहीं कौशल्या और सुमित्रा का चरित्र आदर्श मातृत्व को दर्शाता है। यहाँ तक कि कैकयी और मंदोदरी जैसी नकारात्मक या उपेक्षित मानी जाने वाली नारियों के चरित्र में भी मानवीय संवेदना, पश्चाताप और राजनीतिक दूरदर्शिता दिखाई देती है। वर्तमान भूमंडलीकरण और आधुनिकता के दौर में, जब नैतिक मूल्य लुप्त हो रहे हैं, रामकथा के ये स्त्री पात्र न केवल स्त्री-चेतना को जाग्रत करते हैं, बल्कि नारी की भव्य गरिमा को सुरक्षित रखने में भी पूर्णतः प्रासंगिक हैं।
डॉ. भावना (2026); राम कथा में स्त्री चिंतन व स्वरूप, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences, ISSN(o): 2581-6241, Volume – 9, Issue – 7, Available on – https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/
![SHIKSHAN SANSHODHAN [ ISSN(O): 2581-6241 ] Peer-Reviewed, Referred, Indexed Research Journal.](https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/wp-content/uploads/SS-TITLE-HEADER.png)