29, July 2026

उपनिषदों में निहित शिक्षा-दर्शन एवं शैक्षिक मूल्य

Author(s): डॉ. शोभा भारद्वाज

Authors Affiliations:

सहायक प्राध्यापक, संस्कृत विभाग, दयालबाग़ एजुकेशनल इंस्टिट्यूट, दयालबाग़, आगरा

DOIs:10.2018/SS/202607012     |     Paper ID: SS202607012


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Abstract: इस शोध पत्र का उद्देश्य संस्कृत साहित्य के दस प्रमुख उपनिषदों (ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य एवं बृहदारण्यक) में निहित शिक्षा दर्शन का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करना है। उपनिषदों को वेदों का अंतिम भाग (वेदांत) होने का गौरव प्राप्त है। ये न केवप् भारतीय दर्शन की आधारशिला हैं, अपितु मानव मात्र के समक्ष आत्मा, परमात्मा, जगत् और जीवन के परम लक्ष्य जैसे चिरंतन प्रश्नों को समझने का एक गहन मार्ग भी प्रशस्त करते हैं ।

शोध में उपनिषदों की शिक्षा पद्धति के केंद्र में स्थित गुरु-शिष्य परंपरा, प्रश्न और संवाद की विधा तथा अनुभूति के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही, 'महावाक्यों' के माध्यम से स्थापित अद्वैत (आत्मा और ब्रह्म की एकता) के सिद्धांत को नचिकेता-यम संवाद (कठोपनिषद), पिप्पलाद के छह शिष्यों के प्रश्न (प्रश्नोपनिषद) और याज्ञवल्क्य-गार्गी शास्त्रार्थ (बृहदारण्यक) जैसे उदाहरणों की सहायता से व्याख्यायित किया गया है । इस अध्ययन का निष्कर्ष है कि उपनिषदों का शिक्षा दर्शन केवल सैद्धांतिक ज्ञान का संग्रह नहीं है, बल्कि यह आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष की ओर ले जाने वाली एक व्यावहारिक आध्यात्मिक साधना है।

 

Key Words: उपनिषद , शिक्षा-दर्शन , शैक्षिक मूल्य , गुरु-शिष्य परम्परा , आत्म-साक्षात्कार

डॉ. शोभा भारद्वाज  (2026); उपनिषदों में निहित शिक्षा-दर्शन एवं शैक्षिक मूल्य, Shikshan Sanshodhan : Journal of Arts, Humanities and Social Sciences,      ISSN(o): 2581-6241,  Volume – 9,   Issue –  7,  Available on –   https://shikshansanshodhan.researchculturesociety.org/


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